वो लमहा

It’s one life, one chance to make it big!
Go live your dreams! 🙂

तेरे तरीके भी लाजवाब हैं ऊपरवाले,
जिंदगी की कीमत तूने उस दिन समझाई,
जब मौत ने थी मेरी चौखट खटखटाई।

आज पीछे मुङना चाहता हूँ।
हर पल जीना चाहता हूँ।
इस दुनिया से कहना चाहता हूँ,
हर सपना जो सवारा था पूरा करलो,
हर लमहा जो तुमको प्यारा था फिरसे जीलो।

मत गवा इसे, मत रेत की तरह बहा इसे।
जब खोलेगा उस चौखट को,
इस लमहे के लिए तू तरसेगा,
इस लमहे के लिए तू तङपेगा।

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नारी शक्ति

Alot said and done, it’s time to stand up for yourself. It’s time for change.

अब ना मैं चुप रहूंगी,
अब ना मैं कुछ सहूंगी।

बहुत सुन चुकी मैं,
अब मैं बोलूगीं और ये दुनिया सुनेगी।

सदियों से हो रहे शोशण की जंजीरो को अँब तोङूगी।
तू जिस से खेलकर खुश हो जाए मैं वो खिलौना नहीं।

अगर सहना और चुप रहना मेरी लकीरो में था,
तो अब उन लकीरो का रास्ता मैं खुद मोङूगी।
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तू चलता चल

Life isn’t easy. It will push you down, spit on your face and you still need to keep going. It’s easy to give up, it’s tough to keep fighting and win. One who has the spirit to do so is the true winner.

Here is my take on the same through an article.
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आग  का दरिया है और डूब के जाना है। राही का अगर कुछ काम है तो वो  है बस  चलते जाना.पथ पर फूल ही नहीं काटें भी मिलेंगे। जब उन काटो पर पैर रखकर हम मंज़िल  को पा  लेंगे तब उस मंज़िल की कीमत सही मायनो मैं समझ पाएंगे। अगर इस राह पर बीते हर दिन की याद साथ लेकर चलेंगे, हर दिन से कुछ न से कुछ सीखते चलेंगे,तो यक़ीनन बेहतर बनते चलेंगे। कभी सूरज की रौशनी  की तरह तो कभी रात के अँधेरे की तरह, गम और खुशियां, दोनों ही हमारे दरवाज़े पर दस्तक देंगी.

लेकिन हर रात के बाद होते  सवेरे की तरह,गम के बाद खुशियां भी आएंगी और अगर आज कोई बाज़ी हारे है तो कल यक़ीनन कोई और बाज़ी जीत जाएंगे। बस हारकर बैठना नहीं है, चलते जाना है।

हर किसी को साथ चलने के लिए हमसफ़र नही मिलता।
जब तक सुख है, तब तक सब  हैं। हर किसी को दुःख में साथ देने वाला जानशीन नही मिलता। चलना है और अकेले ही चलना है।

एक  न एक दिन तो सबको सदा सदा के लिये  सोना है
फिर क्यों न इस छोटी सी ज़िन्दगी में कुछ ऐसा कर गुज़रे  की ये दुनिया सदा सदा के लिये हमें याद रखे।
“एक बार मिलेगा ये तोफा, जा जी भरके तू जी ले !
इस दुनिया की मत सुन,वो कर जो तेरा दिल कहे।
कुछ ऐसा कर जा, जब जाये इस दुनिया से
हर अख में आसू हो , हर दिल मैं मरके भी तू जिए “

बचपन

कहाँ गए वो दिन,
वो दिन जब हम बच्चे थे,
वो दिन जब हम सच्चे थे।
ना भेद भाव से नाता था,
ना चोट पहुँचाना आता था।
ना छाया था जिंदगी में अँधेरा,
हर दिन था खुशियो का नया सवेरा।

कहाँ गए वो दिन,
वो दिन जब अपने आँसू ना थे छिपाए,
वो दिन जब गिरकर थे मुसकुराए।

आज मैं सच्चा नहीं,
आज मुझमें कुछ अच्छा नहीं।
तब खिलौने से खेलता था,
आज इंसानों से खेलता हूँ।
तब मुसकुराहटों का व्यापारी था,
आज दुखों का सोदागर हूँ!

तब मैं शायद मानव था,
पर आज बस एक दानव हूँ।

कहाँ गए वो दिन,
वो दिन जब हम सच्चे थे,
वो दिन जब हम बच्चे थे।

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स्वच्छ भारत

Clean India campaign is on a roll.
Here is my take on the same.

यह कहानी है सदियों पुरानी,
स्वच्छता को बढ़ावा देने की पूर्वजों ने भी थी ठानी।

फिर आज कयो यह स्थिति है आई,
जब सरकार ने सवचछ भारत के लिए है योजना बनाई ।

क्यों सरकार को पङा हर दरवाजा खटखटाना ,
कि जागो भाई, अब एक स्वचछ भारत है हमें बनाना।

जिस देश मे जनमे, उसी देश मे है गंदगी फैलाई ।
आखिर तभी तो इस योजना की जरूरत सामने आई।

आओ सवचछ भारत का सपना मिलकर सजाऐ,
आओ इस सपने की ओर एक कदम मिलकर बङाए।

यादें

IMG_20141125_044416Some people come in your life to teach you a lesson, and when that’s done, it’s time for them to leave.

Here is my take on the same. 🙂

ना इतना करीब तू जा किसी के,
कि अलविदा तू केह ना पाए,
ना इतना पास आ किसी के,
कि उसके जाने पर तेरी साँसें थम जाए।

हर किसी के हाथ दिल की चाबी थमाई नहीं जाती,
हर किसी के दिल में जगह बनाई नहीं जाती।

ना रोक तू उसकी कशती को,
ना तू उसका कभी किनारा था,
ना वो तेरा कभी सहारा था।

जब जब तुझे वो राही याद आएगा,
साथ बिताया हर लमहा तेरी यादों की चौखट फिर खटखटएगा।

मुनिया

बाबा  यह कलम क्या  होती  है ?

क्या  यह बिलकुल  हथोड़े जैसी होती  है ?

बाबा  कब  तक  छालों  से भरे रहेंगे  मेरे  हाथ ?

कब  तक  किस्मत  नहीं  सुनेगी मेरी  बात  ?

रोज़  मैं  सर  पर  पत्थर ढोती हूँ,

क्या  कभी  अपनी  पीठ पर बस्ता  ढो पाऊँगी  ?

कब  मेरे  हाथों  मैं  हथोड़े  की जगह  कलम  आएगी?

क्या तुम्हारी  मुनिया कभी स्कूल जा पाएगी?

क्या  ५०  रुपये  रोज़  हैं मेरी  ज़िन्दगी  से अच्छे?

क्या  स्कूल  नहीं  जा  सकते गरीब  के  बच्चे?

क्या कोई  नहीं  जो  हमें  उठा सके ?

और  अगर  हम  देश  का कल  है,

तो  उसे  बचा  सके ?

हम हैं  देश  का  भविष्य,

सब  बातें  बेमांनी  हैं।

गरीब  को  उठाने  की ,

किस ने  मन  मैं  ठानी  है ?

 

बाबा क्या  कभी हमारे  भी अच्छे  दिन आएंगे ?

मुनिया  जैसे  कभी  स्कूल  जा पाएंगे  ?

 

लेकिन  बाबा तुम  भी क्या  कर सकते हो?

अकेले कितनो का पेट भर सकते हो?

जानती हूँ की जिस दिन तुम्हारी मुनिया स्कूल  जाएगी,

उस दिन भूके  पेट घर  मैं किसी को नींद  नहीं  आएगी ।