समय का पहिया

आज जब बेटा हाथ थामने से कतराया,
तो अपना बीता कल याद आया…

तुझे चलना उसने सिखाया,
हर मोड़ पर गिरने से बचाया,
खुद रात में जाग तुझे चैन से सुलाया,
तेरी हर ख्वाहिश को सराखों पर बिठाया,
उसी हाथ को थामने से अब तू क्यों कतराया?

साथ जड़ों ने है निभाया,
इसलिए तू हरा भरा पेड़ बन पाया।
आज जो तू सीना ताने खड़ा है,
इनका उसमें हाथ बड़ा है।

आज जब वो मेरी पुकार भी ना सुन पाया,
तो बस एक खयाल दिल में आया,
समय का पहिया है,
घूमना तो था ही।

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